वर्मीकम्पोस्ट (केंचुआ खाद) क्या है? विधि, उपयोग व लाभ!

आपने वर्मीकम्पोस्ट (केंचुआ खाद) के बारे अक्सर सुना होगा। ऑर्गनिक या जैविक खेती करने के लिए वर्मीकम्पोस्ट बहुत जरुरी होता है। इस पोस्ट में मैं आपको vermicompost के बारे में बताने वाला हूँ कि वर्मीकम्पोस्ट क्या होता है, कैसे तैयार होता है और प्रति एकड़ कितना वर्मीकम्पोस्ट इस्तेमाल किया जाता है। कुछ उन्नत किसान वर्मीकम्पोस्ट व्यापार करके लाखों रूपये भी कमा रहे हैं अगर आप गांव से ताल्लुक रखते हैं या आपके पास कुछ खाली जमीन है तो आप वर्मीकम्पोस्ट व्यापार आसानी से कम लागत में शुरू कर सकते हैं।

वर्मीकम्पोस्ट (केंचुआ खाद) क्या है?

Vermicompost एक जैविक उर्वरक है जो जैविक अपशिष्ट पदार्थों को विघटित करके तैयार किया जाता है। जैविक पदार्थों के विघटन की प्रक्रिया में केंचुआ की मदद ली जाती है इसलिए इसे केंचुआ खाद भी कहा जाता है। वर्मीकम्पोस्ट एक कार्बनिक पदार्थ है जिसमें रासायनिक उर्वरकों की तरह बदबू नहीं आती है। वर्मीकम्पोस्ट एक गंधरहित और स्वच्छ उर्वरक है जिसमे पौधों के विकास के लिए कई आवश्यक सूक्ष्म पोषक तत्व भरपूर मात्रा में शामिल होते हैं।

आसान भाषा में कहूं तो “केंचुओं द्वारा गोबर, घास-फूस, कचरा आदि कार्बनिक पदार्थ निगलने के बाद जब यह इनके पाचन तंत्र से पिसी हुई अवस्था में बाहर आते हैं तो यह केंचुआ खाद कहलाता है।

इसमें पर्याप्त मात्रा में पोटाश, नाइट्रोजन, और पोटाशियम के साथ साथ पौधों के लिए आवश्यक तत्व पाए जाते हैं। जैविक खेती के लिए वर्मीकम्पोस्ट सबसे जरुरी और कारगर पोषक स्रोत है। Vermicompost खेती के साथ पर्यावरण और मिट्टी के लिए भी लाभदायक और अनुकूल है। आज के समय में कृषि रसायनों और रासायनिक उर्वरकों के लगातार और भरी मात्रा में उपयोग किये जाने के कारण उत्पन्न सब्जी, फ़ल, दाल, या अनाज का सेवन स्वास्थय के लिए हानिकारक होता है, और इन रसायनों का लगातार उपयोग करने के कारण मिट्टी में जीवाश्म कार्बन का स्तर काम हो रहा है।

ऐसे में आप Vermicompost का खेती में उपयोग करके जैविक खेती भी कर सकते और आप वर्मीकम्पोस्ट व्यवसाय भी कर सकते हैं।

केंचुआ और केंचुआ खाद की क्या उपयोगिता हैं

केंचुए को किसान का मित्र और मिट्टी की शान कहा जाता है क्योंकि केंचुए मिट्टी निर्माण और मिट्टी की उत्पादकता में महत्वपूर्ण भूमिका अदा करते हैं| ये मिट्टी में छेद करते हैं, जिससे उसके अन्दर वायु संचार बढ़ता है| केंचुए मिट्टी को खाकर बाहर निकालते हैं, जिससे मिट्टी पलटने का कार्य भी होता है फलस्वरुप मिट्टी भुरभुरी हो जाती है। केंचुए तथा अन्य सूक्ष्म कीट एक साल में 50,000 किलोग्राम प्रति हेक्टेअर कार्बनिक पदार्थों को विघटित कर खेत को उपयोगी बनाते हैं।

वर्मीकम्पोस्ट कैसे तैयार करते हैं?

वर्मीकम्पोस्ट बनाने की विधि: केंचुआ खाद या Vermicompost तैयार करने से पहले इसके लिए उपयुक्त स्थान और तापमान का चुनाव करना बेहद जरुरी है। गलत स्थान और गलत तापमान में केंचुए मर सकते हैं या ज्यादा क्रियाशील नहीं होंगे तो खाद तैयार नहीं होगी और आपको नुकसान हो सकता है।

वर्मीकम्पोस्ट बनाने के लिए सही स्थान का चुनाव करना

केंचुआ खाद बनाने के लिए छायादार व नम वातावरण की आवश्यकता होती है| इसलिए घने छायादार पेड़ के नीचे या हवादार फूस के छप्पर के नीचे केंचुआ खाद बनाना चाहिये| स्थान के चुनाव के समय उचित जल निकास व पानी के स्त्रोत के नजदीक का विशेष ध्यान रखना चाहिए|

केंचुआ खाद तैयार करने के लिए वैसे तो आप इसे किसी भी खाली स्थान पर तैयार कर सकते हैं लेकिन आपको ध्यान रखना है कि वह स्थान नम हो और वहां ज्यादा धुप या सीधे धुप न पड़ती हो। इसके लिए छायादार घने पेड़ या छप्पर के नीचे हवादार जगह इंतजाम करना चाहिए। इसमें समय समय पर पानी की आवश्यकता होगी अतः पानी के स्रोत और जल निकास का विशेष तौर पर ध्यान रखना है।

केंचुआ खाद या Vermicompost बनाने का उचित समय/मौसम

इसके लिए आप पूरा साल में किसी भी समय खाद तैयार कर सकते हैं लेकिन ज्यादा ठण्ड या गर्मी में केंचुए काम क्रियाशील रहते हैं और ऐसे में खाद तैयार होने में सामान्य से थोड़ा अधिक समय लगता है। सामान्यतः 15 से 20 डिग्री सेंटीग्रेड तापक्रम या सामान्य तापमान पर केंचुए सर्वाधिक कार्यशील होते हैं।

वर्मीकम्पोस्ट बनाने की मुख्य विधियां

  1. चार हौद विधि या चार चक्रीय विधि
  2. पेड़ विधि
  3. बेड विधि
  4. HDPE Organic Vermi Compost Maker Bed द्वारा टटिया विधि

अब हम इन सभी विधियों के बारे में सीखते हैं, जो आपके अनुसार सही हो आप उसे अपना सकते हैं।

1. वर्मीकम्पोस्ट बनाने की चार हौद विधि या चार चक्रीय विधि (Four-pit method)

ऊपर बताई गयी बातों को ध्यान में रखते हुए स्थान का चुनाव करने के बाद छायादार स्थान पर पक्की ईंटो से 16 फिट लम्बाई, 16 फिट चौड़ाई, और 2.5 फिट ऊंचाई का एक गड्‌ढा बनाया जाता है। इस गड्‌ढे को दो ईंटों (9 इंच) की दीवारों से 4 बराबर भागों में बांट दिया जाता है। इस प्रकार अब हमारे पास कुल 4 क्यारियां या गडढे हो जाते है।

वर्मीकम्पोस्ट Vermicompost Four-pit method

विभाजक या बाँटने वाली दीवारों में समान दूरी पर हवा व केंचुओं के आने जाने के लिए ऊपर दिखाए चित्रानुसार छिद्र छोड़े जाते हैं। इस प्रकार की क्यारियों की संख्या जरुरी हैं है आप चार ही रखें, इसे आवश्यकतानुसार बढ़ाया जा सकता है।

इस विधि में सभी क्यारियों को एक साथ नहीं भरना होता है। सबसे पहले एक गडढे को जैविक कचरे से पूरी तरह भरते हैं, उसके बाद दूसरे, तीसरे, चौथे इत्यादि।

सबसे पहले गडढे को गोबर से भरते हैं इसमें आप जैविक कचरे को भी मिक्स कर सकते हैं। मोटे कार्बनिक अवशिष्टों जैसे पत्तियों का कूड़ा, पौधों के तने, गन्ने की भूसी/खोयी को गलने में समय लगता है इससे खाद बनने में ज्यादा समय लगता है इसलिए इन्हे 2-4 इन्च आकार के छोटे-छोटे टुकड़ों में काटा जा सकता है।

गडढे में जैविक कचरे और गोबर को मिक्स करने के लिए सबसे नीचे 5 से 6 इंच मोटी जैविक कचरे की परत बिछाते हैं फिर इसके ऊपर एक 2 से 3 इंच की परत गोबर की बिछा देते है फिर इसके ऊपर एक और जैविक कचरे की 5 से 6 इंच मोटी परत बिछाते हैं फिर इसके ऊपर गोबर की परत। इसी प्रकार धीरे धीरे एक के बाद एक परत बिछाकर गड्ढ़े या क्यारी को पूरी तरह से भर देते हैं।

लगभग पहले एक महीने तक, पहला गड्‌ढा भरते हैं पूरा गड्‌ढा भर जाने के बाद उसपर पानी छिड़क कर उस गडढे को काली पॉलीथिन से ढक देते हैं ताकि कचरे के विघटन की प्रक्रिया शुरू हो जाये। इसके बाद दूसरे गड्‌ढे में कचरा भरना शुरू कर देते हैं। याद रहे अभी हमने केंचुए नहीं डाले हैं और अभी डालने नहीं हैं।

अब दूसरे महीने में पहले गड्ढ़े की तरह दूसरे गड्ढ़े को भी भरते हैं और उसे भी काली पॉलीथिन से ढक कर छोड़ देते हैं और तीसरा गड्ढ़ा भरना शुरू करते हैं। अब यहाँ ध्यान देना है कि अब तक लगभग दो महीने पहले, सबसे पहले भरे गए गडढे का जैविक कचरा अधगले रूप मे परिवर्तित हो चुका होगा।

अब सबसे पहले भरे गए इस गड्ढ़े के ऊपर से काली पॉलीथिन उतारकर एक दो दिन के लिए इसे ऐसे ही छोड़ देना है ताकि इस गड्‌ढे का तापमान कम हो जाए। अब जब तापमान काम/सामान्य हो जाये इसके बाद उसमें लगभग 7 किलो ग्राम (करीब 7000) केंचुए छोड़ देते हैं। 

केंचुए छोड़ने के बाद इस गड्‌ढे को सूखी घास अथवा जूट की बोरियों से ढक देते हैं और कचरे में नमी बनाये रखने के लिए आवश्यकतानुसार समय समय पर पानी छिड़कते रहते है।

इस प्रकार 3 माह बाद जब तीसरा गड्‌ढा भी कचरे से भर जाता है तब इसे भी पानी से भिगो कर ढक देते हैं और इसके ऊपर भी काली पॉलिथीन डाल देते हैं और चौथे को गड्‌ढे में कचरा भरना आरम्भ कर देते हैं। धीरे-धीरे जब दूसरे गड्‌ढे की गर्मी कम हो जाती है तब उसमें अलग से केंचुए छोड़ने की जरुरत नहीं होगी।

केंचुए पहले गड्‌ढे से विभाजक दीवार में बने छिद्रों से होते हुए खुद ही प्रवेश कर जाते हैं और उसमें भी केंचुआ खाद बनना आरम्भ हो जाती है। इस प्रकार लगातार चार माह में एक के बाद एक चारों गड्‌ढे भर जाते हैं। इस समय तक सबसे पहले गड्‌ढे में, जिसे भरे हुए तीन माह हो चुके हैं, केंचुआ खाद (वर्मीकम्पोस्ट) बनकर तैयार हो जाती है। इस पहले गड्‌ढे के सारे केंचुए दूसरे एवं तीसरे गड्‌ढे में धीरे-धीरे बीच की दीवारों में बने छिद्रों से होते हुए प्रवेश कर जाते हैं।

अब पहले गड्‌ढे में जैविक खाद तैयार हो चुकी है जिसे निकाल लेते हैं और गडढे को दोबारा जैविक कचरे भरना शुरू कर देते हैं। इस विधि में एक वर्ष में प्रत्यके गड्‌ढे में एक बार में लगभग 10 कुन्तल कचरा भरा जाता है जिससे एक बार में 7 कुन्तल खाद (70 प्रतिशत) बनकर तैयार होती है।

इस प्रकार अगर आप केवल चार गड्ढ़े ही बनाते हैं तो एक वर्ष में चार गड्‌ढों से तीन चक्रों में कुल 84 कुन्तल अच्छी किस्म की जैविक खाद प्राप्त होती है। इसके अलावा एक वर्ष में एक गड्‌ढे से 25 किलोग्राम और 4 गड्‌ढों से कुल 100 किलोग्राम केंचुए भी प्राप्त होते हैं।

2. केंचुआ खाद बनाने की पेड़ विधि

वर्मीकम्पोस्ट या केंचुआ खाद बनाने की इस विधि में किसी पेड़ के चारों ओर जैविक कचरा तथा गोबर गोलाई में डाला जाता है। प्रतिदिन धीरे धीरे पेड़ के चारों ओर एक घेरे में गोबर और कचरा डालते हैं। अब इसमें जब पेड़ के चारों तरफ पड़ा हुआ कचरा और गोबर अधगला हो जाये तो उसमे जरूरत और गोबर और कचरे की मात्रा के हिसाब से केंचुए डाल देते हैं।

वर्मीकम्पोस्ट केंचुआ खाद बनाने की पेड़ विधि

अब केंचुए डालने के बाद इस विधि में भी इसे जूट के बोरे से ढक दिया जाता है। पेड़ के चारों तरफ के इस गोल चक्र मे नमी रखने के लिए जूट के बोरों के ऊपर से ही समय-समय पर पानी का छिड़काव किया जाता है।

अब ये केंचुए अधगले जैविक कचरे और गोबर को खाते हुए धीरे-धीरे आगे बढ़ते जाते हैं और अपने पीछे के कचरे और गोबर का वर्मी कम्पोस्ट तैयार करते जाते हैं। इस प्रकार, तैयार वर्मी कम्पोस्ट को इकठ्ठा करके उसमे से केचुओं को छान कर अलग कर लेते है। इसके बाद वर्मी कम्पोस्ट को बोरों में भरकर खेती में उपयोग करने हेतु रख लिया जाता है।

3. बेड विधि

वर्मी कॉम्पोस्ट तैयार करने के लिए आज के इस समय में सबसे अधिक बेड विधि प्रयोग में लायी जाती है। इस विधि में किसी छायादार जगह पर जमीन के ऊपर ईंटो की सहायता से 5 से 6 फिट की चौड़ाई, लगभग 2 फिट ऊंचाई, और अपनी आवश्यकता अनुसार लम्बाई के बेड बना लिए जाते हैं। 

Vermi Compost खाद निर्माण करने के लिए गाय-भैंस का गोबर, जानवरों के नीचे बिछाए गए घासफूस-खरपतवार के अवशेष कचरे आदि को आपस मे मिलाकर ढेर के रूप में लगभग लगभग 1.5 फिट ऊंचाई के बेड बनाये जाते हैं।

केचुओं को अँधेरा पसंद होता है इसलिए अब बेड के ऊपर जूट की बोरी, पुवाल और घास फूंस आदि डालकर ढक दिया जाता है जिससे केचुओं को अनुकूल वातावरण मिल सके। एक बेड का निर्माण हो जाने पर उसके बगल में दूसरे उसके बाद तीसरे बेड बनाते हुए जरूरत के अनुसार कई बेड बनाये जा सकते हैं।

शुरुआत में पहले बेड में केंचुए डालने होते हैं और जब उस बेड में उपस्थित गोबर और जैवक कचरा खाद में परिवर्तित हो जाता है तो केंचुओ को छान कर वर्मी कॉम्पोस्ट से अलग करके इन्हें दूसरे बेड में डाल दिया जाता है। अब इस बेड से मिला वर्मी कम्पोस्ट अलग करके छानकर सुरक्षित कर लिया जाता है तथा पुनः इस पर गोबर आदि का ढेर लगाकर बेड बना लेते हैं।

4. HDPE Organic Vermi Compost Maker Bed द्वारा टटिया विधि

इस विधि मे प्लास्टिक की बोरी या तिरपाल से बांस के माध्यम से टटिया बनाकर वर्मी कम्पोस्ट का निर्माण किया जाता है। वर्मीकम्पोस्ट तैयार करने के लिए HDPE Organic Vermi Compost Maker Bed के बने बनाये बैग भी आते हैं। किसान भाई घर पर ही प्लास्टिक की बोरियों को खोलकर और कई बोरियो को एक साथ मिलाकर सिलाई करके भी इस तरह की टटिया तैयार कर सकते है। या फिर बाजार से भी इन्हें खरीद सकते है।

इन सिली हुई बोरियो को बांस या लट्ठे के सहारे चारों ओर से सहारा देकर गोलाई में रख कर उसमें गोबर जैव अवशेष डाल दिया जाता है। गोबर के अधगला होने पर गोबर में केंचुए डाल दिए जाते है। टटिया विधि से वर्मी कम्पोस्ट का निर्माण करने पर लागत बहुत ही कम आती है। और इसे ज़रूरत के अनुसार उठा कर एक जगह से दूसरी जगह पर भी आसानी से रखा जाता है।

लेकिन HDPE Organic Vermi Compost Maker Bed बाजार से खरीदना महंगा पड़ता है और ये ज्यादा दिन नहीं चलते हैं।

Vermi Compost तैयार करने की पूरी प्रक्रिया

  • पहले जैविक कचरा तथा गोबर एकत्रित करके इसमें से पत्थर, काँच, प्लास्टिक, रबर तथा धातुओं को निकाल कर अलग कर देना चाहिए जिससे केंचुओं को परेशानी न हो और खाद बनने की प्रक्रिया जल्दी हो पाए।
  • बड़े आकर के जैविक कचरे जैसे; फसल की पत्तियां, पौधों के तने, गन्ने की खोयी इत्यादि को काटकर 2-4 इन्च आकार के छोटे-छोटे टुकड़ों में बदल लें। ऐसा करने से भी वर्मी कम्पोस्ट खाद बनने में कम समय लगता है।
  • जैविक कचरे से दुर्गन्ध दूर करने तथा अवाँछित जीवों को खत्म करने के लिए कचरे को उपयोग करने से पहले एक फुट मोटी सतह के रुप में फैलाकर धूप में सुखाया जाता है।
  • अब जैविक कचरे को गाय या भैंस के गोबर में अच्छी तरह मिलाकर करीब एक माह तक सड़ने सड़ाने के लिए गड्डों अथवा बेड में एक ढेर के रूप मे डाल दिया जाता है। इस ढेर मे पर्याप्त नमी बनाये रखने के लिए आवश्यकतानुसार पानी का छिड़काव किया जाता है।
  • वर्मी कम्पोस्ट तैयार करने के लिए सबसे पहले बेड या गडढे के फर्श पर बालू की 1 इन्च मोटी पर्त बिछाई जाती है फिर इसके ऊपर 3-4 इन्च मोटाई में फसल के अवशिष्ट की पर्त बिछाते हैं। पुन: इसके ऊपर एक माह तक गले कचरे और गोबर की 18 इन्च मोटी पर्त इस प्रकार बिछाते हैं। इस प्रकार तैयार किये गए 10 फिट लम्बाई के बेड में लगभग 500 कि.ग्रा. कार्बनिक अवशिष्ट समा जाता है।
  • गोबर और कचरे से बारे हुए इस बेड को आधा खाली रखा जाता है ताकि केंचुए को बेड में घूमने के लिए पर्याप्त स्थान और हवा का प्रबंधन ठीक प्रकार से संभव हो सके। अब इस बेड को 2-3 दिन के लिए ऐसे ही रहने दिया जाता है। बेड मे उचित नमी बनाये रखने के लिए पानी का छिड़काव किया जाता है।
  • दो तीन दिन बाद बेड के सभी भागों में जब तापमान सामान्य हो जाये तब एक बेड में बेड की एक तरफ से लगभग 5000 केंचुए इस प्रकार डालते हैं कि यह लम्बाई में एक तरफ से पूरे बेड तक आसानी से पहुँच जाये।
  • बेड या गड्ढ़े को फसलों के अवशिष्ट जैसे धान की पुआल की 3-4 इन्च मोटी पर्त से ढक देते हैं। बेड को ढकने के लिए जूट के बोरो का प्रयोग भी अच्छा होता है। अनुकूल वातावरण  मिलने पर केंचुए इस पूरे बेड पर अपने आप फ़ैल  जाते हैं। ज्यादातर केंचुए बेड में 2-3 इन्च गहराई पर रहकर कार्बनिक पदार्थों को खाकर  वर्मी कम्पोस्ट का उत्सर्जन करने लगते हैं।
  • अनुकूल आर्द्रता, तापक्रम तथा हवामय वातावरण में 25 से 30 दिनों के बाद बेड की ऊपरी सतह पर 3-4 इन्च मोटी केंचुआ खाद (वर्मी कम्पोस्ट) एकत्र हो जाती हैं। इसे अलग करने के लिए बेड की बाहरी आवरण सतह को एक तरफ से हटाते हैं।  ऐसा करने पर जब केंचुए बेड में गहराई में चले जाते हैं तब केंचुआ खाद को बेड से आसानी से अलग कर लिया जाता है। इसके बाद बेड को फिर से पहले की तरह कचरे या जूट के बोरो से ढक कर पर्याप्त आर्द्रता बनाये रखने हेतु पानी का छिड़काव कर देते हैं।
  • अब फिर से लगभग 5-7 दिनों में दोबारा वर्मी कम्पोस्ट की 4-6 इन्च मोटी एक ओर पर्त तैयार हो जाती है। इसे भी पूर्व की भाँति ही अलग कर लिया जाता हैं। तथा बेड में फिर पर्याप्त आर्द्रता बनाये रखने हेतु पानी का छिड़काव किया जाता है |
  • इसी प्रकार प्रति सप्ताह के अंतराल पर बेड के ऊपर वर्मी कम्पोस्ट की 5 से 6 इंच मोटी पर्त तैयार होती रहेगी। इस प्रकार 40 से 45 दिनों मे लगभग 85 प्रतिशत वर्मी कम्पोस्ट बनकर तैयार हो जाती है।
  • अंत में बेड पर बची बाकी 15 प्रतिशत कॉम्पोस्ट कुछ केंचुओं तथा केचुए के अण्डों सहित दूसरी बार बेड तैयार करते समय प्रयोग कर लेते हैं। इस प्रकार लगातार केंचुआ खाद उत्पादन के लिए इस प्रक्रिया को दोहराते रहते हैं।
  • तैयार किये गए वर्मीकम्पोस्ट को प्लास्टिक/एच0 डी0 पी0 ई0 थैले में सील करके पैक किया जाता है ताकि इसमें नमी कम न हो।

वर्मीकम्पोस्ट तैयार करते समय ध्यान देने वाली कुछ जरूरी बातें

कम समय में उच्च गुणवत्ता वाली वर्मीकम्पोस्ट बनाने के लिए कुछ बातों पर ध्यान बेहद जरुरी है। खाद बनाने के दौरान एक छोटी सी गलती से आपको नुकसान हो सकता है तो नीचे दी हुई बातों का अवश्य ध्यान रखना है।

  • वर्मी कम्पोस्ट तैयार करने वाले बेडों अथवा गडढों में केंचुआ छोड़ने से पहले कच्चे उत्पाद (गोबर व आवश्यक कचरा) का आंशिक विच्छेदन कर लेना जरूरी है। जिसमें15 से 20 दिन का समय लगता है
  • केंचुए डालने से पहले वर्मी बेड पर डाले गए गोबर तथा कचरे के ढेऱ में गहराई तक हाथ डालकर देख लेना चाहिए। अगर गहराई तक हाथ डालने पर गर्मीं महसूस नहीं होती है तब कह सकते हैं कि कचरे के अंदर का तापमान सामान्य है और तभीउसमें केंचुए डालने चाहिए।
  • कचरें में नमीं कम या अधिक होने पर केंचुए ठीक तरह से कार्य नही करतें हैं इसलिए वर्मी बेडों से अच्छी वर्मी कम्पोस्ट तैयार करने के लिए गोबर तथा कचरे के ढेर मे 30 से 40 प्रतिशत नमी बनाये रखना जरूरी है।
  • वर्मी कम्पोस्ट बेडों पर पड़े कचरे के ढेर के अंदर का तापमान 20 से 27 डिग्री सेल्सियस रहना बहुत जरूरी है। कम या अधिक तापमान होने पर केंचुए मरने लगते है। तेज धूप पड़ने से कचरे का तापमान बढ़ जाता है और केंचुए बेड की तली में चले जाते हैं या अक्रियाशील रह कर मर जाते हैं। इसलिए इन बेडों पर तेज धूप न पड़ने दें।
  • वर्मी कम्पोस्ट बनाते समय इस बात का विशेष ध्यान रखे कि बेड अथवा गडढे में ताजे गोबर का प्रयोग कभी भी न करें। ताजे गोबर में अधिक गर्मी होने के कारण केंचुए मर जाते हैं।
  • अच्छी गुणवत्ता की वर्मी कम्पोस्ट तैयार करने के लिए जैविक कचरे में गोबर की कम से कम 20 प्रतिशत मात्रा होनी चाहिए।
  • कचरे का पी. एच. उदासीन (7.0 के आसपास) रहने पर केंचुए तेजी से कार्य करते हैं। कचरे का पी. एच. उदासीन बनाये रखने के लिए। बेड तैयार करते समय उसमें राख अवश्य मिलाएं।
  • केंचुआ खाद बनाने के दौरान किसी भी तरह के कीटनाशकों का उपयोग न करें।
  • खाद की पलटाई या तैयार कम्पोस्ट को एकत्र करते समय खुरपी या फावडे़ का प्रयोग न करें इससे केंचुए कट कर मर जाते हैं।

केंचुओं की प्रजाति का चुनाव कैसे करें

वैसे तो केंचुआ खाद बनाने में कई प्रजातियों को काम में लाया जाता है, किन्तु कृषकों के लिए आइसीनिया फोटिडा प्रजाति सर्वदा उपयुक्त है| इस प्रजाति का रख-रखाव भी आसान होता है|

केंचुआ कहाँ से और कितने महंगे मिलते हैं?

एक किलो केंचुआ 610 रुपए किलो में बिकता है।

प्रति एकड़ कितना वर्मीकम्पोस्ट उपयोग करें?

15 से 20 क्विंटल प्रति एकड़ की दर से इस खाद का उपयोग करें। वर्मी कम्पोस्ट के एक किलो के पैकिट 15-20 रुपए में बिक्री हो जाती है, कृषि विभाग से लेकर गैर सरकारी संस्थाएं इन पैकिटों को खरीदती हैं।

क्या आप अपने घर पर गार्डन/आंगन में सब्जियां या फल के पौधे उगाते हैं?

अगर हाँ, तो आप इस पोस्ट में अब तक वर्मीकम्पोस्ट प्रयोग करने के फायदे जान चुके होंगे। रासायनिक उर्वरकों इत्यादि का उपयोग करना हमारे स्वास्थ्य पर बुरा असर डालता है। इसलिए, गमलों, किचन के लिए घर में उगाई हुई सब्जियों या अपने गार्डन के लिए आप वर्मीकम्पोस्ट को ऑनलाइन भी खरीद सकते हैं।

इसके काफी अच्छे परिणाम आपको देखने को मिलेंगे। आप शुरुआत में इसे आज़माने के लिए पांच किलो या दस किलो का पैकेट ले सकते हैं। जब आपको इसका फायदा समझ आने लगे तो इसका रेगुलर इस्तेमाल कर सकते हैं।

वर्मीकम्पोस्ट या फार्मिंग बिज़नेस ट्रेनिंग हेतु

वर्मीकम्पोस्ट ट्रेनिंग एवं ज्यादा जानकारी के लिए आप निम्न स्थानों पर संपर्क कर सकते है या अपने नजदीकी कृषि विज्ञान केंद्र पर संपर्क करें।

निष्कर्ष

इस प्रकार इस पोस्ट में मैंने वर्मीकम्पोस्ट के बारे में आपको बता दिया है कि वर्मीकम्पोस्ट (केंचुआ खाद) क्या है? इसके बनाने की कौन सी विधि हैं, वर्मीकम्पोस्ट (केंचुआ खाद) के उपयोग व लाभ! इस पोस्ट में हमने इनके बारे में सीखा है। आप वर्मीकम्पोस्ट का बड़े पैमाने पर उत्पादन करके एक कम लागत में अच्छा व्यवसाय भी कर सकते हैं। अगर आपका अभी भी कोई भी सवाल है तो आप कॉमेंट करके पूछ सकते हैं या ऊपर दिए हुए पते पर संपर्क कर सकते हैं। धन्यवाद।

2 thoughts on “वर्मीकम्पोस्ट (केंचुआ खाद) क्या है? विधि, उपयोग व लाभ!”

Leave a Comment