Jaivik Kheti [जैविक खेती] से हर साल 40 करोड़

जी हाँ, टाइटल में अपने बिलकुल सही पढ़ा है। एक युवा किसान jaivik kheti करके हर साल 40 करोड़ से अधिक का कारोबार करता है। ऐसे काफी किसान हैं जो कम जमीन में जैविक खेती या Organic Farming करके फल या सब्जियों को उनके मूल्य से कई गुना दाम पर बेचकर औसत किसान से कहीं ज्यादा कमाई करते हैं।

आपने अक्सर जैविक खेती (organic kheti) का नाम सुना होगा। काफी संस्थाएं बोलती हैं कि jaivik kheti (organic farming) करो, organic kheti से उगाये फल फ्रूट और सब्जियां खाओ, स्वास्थ्य अच्छा रहता है। लेकिन हममें से काफी लोग नहीं जानते हैं कि organic farming (jaivik kheti) क्या होती है? Organic kheti kaise kare?

इस पोस्ट में मैं आपको बताऊंगा What is organic farming in hindi? एकदम आसान भाषा, Hindi में कि jaivik kheti क्या होती है? jaivik kheti या organic kheti kaise kare? organic vegetables और Fruits खाने के क्या फायदे हैं? और जैविक खेती से हर साल 40 करोड़ का कारोबार करने वाले किसान कौन हैं? इन सभी सवालों के जवाब आपको इस पोस्ट में मिलेंगे।

Jaivik Kheti क्या होती है?

ऑर्गेनिक या जैविक खेती एक फसल उत्पादन की एक परिपूर्ण उत्पादन प्रक्रिया है। इस प्रक्रिया में किसान खेत में मिट्टी को जीवंत रखते हुए खेती कर फसलों का उत्पादन करते हैं। jaivik kheti वह सदाबहार कृषि पद्धति है, जो पर्यावरण की शुद्धता बरकरार रखती है, भूमि के प्राकृतिक स्वरूप को बनाए रखती है, मिट्टी की जल धारण क्षमता बढ़ाती है, इसमें रसायनों का उपयोग कम होता है और कम लागत में गुणवत्तापूर्ण उत्पादन होता है।

मिट्टी का स्वास्थ्य बरकरार रखने के लिए खेत में गाय, बकरी, भैंस आदि के गोबर, जलीय अपशिष्ट और फसलों के अवशेषों का उपयोग किया जाता है, जिनमें कुछ लाभदायक सूक्ष्मजीव होते हैं।

देशी गाय का गोबर व मूत्र खेती में किस तरह लाभदायक है

देशी गाय की नस्ल जैविक खेती के लिए वरदान मानी जाती है क्योंकि देशी गाय के गोबर व मूत्र में बैक्टीरिया अधिक होते हैं। क्योंकि आज के समय में रासायनिक उर्वरकों के उपयोग से जमीन में पोषक तत्वों की तो कमी आयी ही है, उनको फसल तक पहुंचाने वाले बैक्टीरिया भी खत्म हो गए हैं। ऐसे में देशी गाय के गोबर व मूत्र से जमीन को पोषक तत्वों के साथ पोषक तत्वों को फसल तक पहुँचाने वाले बैक्टीरिया भी मिलते हैं।

ऐसा माना जाता है कि एक देशी गाय के गोबर व मूत्र से एक हेक्टेअर जमीन में जैविक खेती की जा सकती है। देशी गाय के गोबर व मूत्र के प्रयोग से खेतों में पोषक तत्वों और फसल तक पोषक तत्व पहुँचाने वाले बैक्टीरियाओं की की कमी नहीं आएगी।

Organic Kheti kaise kare, jaivik kheti और प्रकृति संतुलन

आज तकनीकी ने बहुत तरक्की कर ली है लेकिन मानव अपने स्वार्थ के लिए लगातार प्रकृति को हानि पहुंचा रहा है। किसान फसल में उत्पादन बढ़ाने के लिए अलग अलग तरह के रसायनों और उर्वरकों का अंधाधुंध इस्तेमाल करता है। लेकिन जैविक खेती प्रकृति के बिलकुल भी खिलाफ नहीं है बल्कि यह प्रकृति के साथ मिलकर अपने समस्त ज्ञान तकनीकों और उपलब्ध संसाधनों का उपयोग करते हुए की जाती है।

इसमें प्रकृति और खेती के बीच एक स्वस्थ संतुलन बनाते हुए पारंपरिक खेती को आधुनिक वैज्ञानिक ज्ञान के साथ जोड़ते हुए खेती की जाती है। जिसमे फसल एवं जानवर विकसित होते और फलते फूलते हैं।

जैविक खेती से भूमि की उपजाऊ क्षमता में वृद्धि हो जाती है,भूमि की जल धारण क्षमता बढ़ती है, भूमि से पानी का वाष्पीकरण कम होता है, jaivik kheti में जैविक खाद के उपयोग करने से भूमि की गुणवत्ता में सुधार आता है, सिंचाई अंतराल में वृद्धि होती है, रासायनिक खाद पर निर्भरता कम होने से लागत में कमी आती है

जैविक खेती (organic kheti) से उगाई फसल और स्वास्थ्य का सम्बन्ध

 क्योंकि जैविक खेती के उत्पादन में रासायनिक उर्वरकों, कीटनाशकों, हार्मोन या रासायनिक पोषक तत्वों का इस्तेमाल वर्जित है इसलिए इससे उगाई हुई फसलों के फल, सब्जियों में रासायनिक तत्व नहीं पाए जाते हैं। इसके उत्पादन में पौधे और मिट्टी की रक्षा के लिए जैविक खाद, हरी खाद, बारी बारी से फसल उत्पादन, फसल अपशिष्ट, मिश्रित फसलों का उत्पादन किया जाता है।

organic kheti (जैविक खेती) आधुनिक विधि

आधुनिक तरीके से जैविक खेती करने लिए खेत में गोबर की खाद, केंचुवा खाद (vermi compost ) वर्मी कम्पोस्ट, फसल अवशेष, जीवाणु खाद, जैव उर्वरकों (बायोफर्टिलाइजर), फसल चक्र और प्रकृति में उपलब्ध खनिज जैसे रॉक फास्फेट, जिप्सम आदि द्वारा पौधों को पोषक तत्व दिए जाते हैं।

फसल को हानिकारक कीटों तथा बीमारियों से बचाने के लिए रासायनिक उर्वरकों का उपयोग न करके प्रकृति में उपलब्ध मित्र कीटों, जीवाणुओं और जैविक कीटनाशकों का उपयोग किया जाता है।

अपने आंगन के गमले, बगीचे के लिए जैविक खाद ऑनलाइन खरीदें

अगर अपने अपने आंगन में, गमले, बगीचे में पौधे लगाए हुए हैं तो मेरी सलाह यही है की आपको उनमे रासायनिक उर्वरक इस्तेमाल नहीं करना चाहिए। इसके लिए आप या तो गोबर की खाद इस्तेमाल करें। अगर आप गांव से हैं तो यह आपको आसानी से उपलब्ध हो जाएगी।

लेकिन अगर आप शहर में रहते हैं जहाँ यह विकल्प मौजूद नहीं है तो आप आसानी से एक बेहतरीन जैविक खाद जिसे केंचुआ खाद या वर्मीकम्पोस्ट भी कहा जाता है, ऑनलाइन खरीद सकते हैं। इसके आपको पांच, दस, पंद्रह किलो के पैकेट मिल जायेंगे। शुरुआत में आप पांच किलो का छोटा पैकेट ले सकते हैं इसके बाद आपको जब इसके फायदे दिखेंगे तो आप खुद से इसे अच्छे से समझ जायेंगे। इसे पौधों की पैदावार बहुत अच्छी होती है बिना कोई रसायन का उपयोग किये।

Jaivik Kheti book hindi Buy Online

बड़े पैमाने पर jaivik kheti करने के लिए आपको ट्रेनिंग की आवश्यकता होगी। जैविक खाद तैयार करने या jaivik kheti से सम्बंधित ट्रेनिंग के लिए मैंने पिछली पोस्ट “वर्मीकम्पोस्ट (केंचुआ खाद) क्या है? विधि, उपयोग व लाभ!” में बताया था की आप कैसे ट्रेनिंग ले सकते हैं। इसके अलावा आप अगर इसके बारे में पढ़ना चाहते हैं तो मैं आपको ऑनलाइन उपलब्ध बेस्ट Jaivik Kheti book hindi भाषा में नीचे दिखा रहा हूँ आप इनसे पढ़ सकते हैं।

निहाल सिंह कौन हैं जो ऑर्गेनिक खेती (jaivik kheti) और हर साल 40 करोड़ का कारोबार करते हैं?

जी हाँ, महज चार एकड़ से organic kheti शुरू करने वाले युवा किसान, निहाल सिंह ने पिछले साल 35 करोड़ का कारोबार किया है। तो चलिए इनके बारे में थोड़ा जान लेते हैं की ये कहाँ से हैं और इन्होने कौन से फसल उगाई थी।

जहां एक ओर आजकल किसान मुनाफे के लिए अंधाधुंध रासायनिक खादें और कीटनाशक का उपयोग करते हैं, वहीं एक युवा किसान, निहाल सिंह ने आर्गेनिक खेती से हर साल 40 करोड़ का कारोबार करने वाला व्यापार जमाया है। निहाल सिंह जी का मानना है कि अगर खाना शुद्ध होगा तो शरीर शुद्ध होगा, शरीर में विकारों से विचारों में विकार आते हैं, और इसके बाद समाज भी विकृत ही होगा।

निहाल सिंह बरेली से करीब 40 किमी दूर आंवला में करीब 60 गाँवों के 3000 किसानों को आर्गेनिक खेती सिखाकर उनका माल अपनी कंपनी के जरिए अमेरिका और जर्मनी एक्सपोर्ट करते हैं लेकिन हम सभी जानते हैं कि शुरूआत में यह इन्हे लिए भी इतना आसान नहीं रहा होगा।

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किसानों को अपने खेतों में विदेशी मेहमानों से मिलवाते निहाल सिंह

आए दिन किसानों की आत्महत्या और बेकारी की खबरों के बीच हर किसान की तरह निहाल सिंह के माता-पिता भी उन्हें किसान नहीं बनने देना चाहते थे। निहाल सिंह ने नौकरी की, पर नौकरी में दिल नहीं लगा और उन्होंने जैविक खेती करने की ठान ली।

निहाल सिंह बताते हैं कि “मेरा पूरा समर्पण जैविक खेती के लिए है, हमने कुछ स्पेशल नहीं किया बस उसी पुरानी पद्धति में जो हमारे पूर्वज करते थे, उसमें थोड़ा अध्ययन किया और जैविक खेती में लागू किया” निहाल सिंह यह भी बताते हैं कि “जो पहले खराब हो चुका है उसे सुधारने के लिए उन्होंने काम किया। जिससे पहले हम शिखर पर थे उन कारणों का भी अध्ययन किया।”

निहाल सिंह जी एक और बहुत खूबसूरत बात बताते हैं कि “एग्रीकल्चर को लोग सिर्फ खेती ही मान लेते हैं, जबकि ‘कल्चर‘ एक पद्धति है, इसे हम लोग भूल सा गए हैं। हम पहले विश्वगुरू कृषि की ही बदौलत थे, लेकिन आज खेती को निम्न दर्जे का माना जाने लगा।” और यह बात सौ प्रतिशत सत्य है।

निहाल सिंह की कम्पनी का नाम है “पवित्र मेंथा” इसने पिछले साल वर्ष 2019 में 40 करोड़ रुपये का कारोबार किया जिसमे 35 करोड़ का कारोबार केवल आर्गेनिक मेंथा का रहा। निहाल सिंह की कंपनी ‘पवित्र मेंथा‘ के साथ 3000 किसान जुड़े हुए हैं। शुरुआत में किसानों को घाटा हुआ तो निहाल सिंह को खुद से पूरा करना पड़ा, लेकिन हार नहीं मानी।

jaivik kheti पवित्र मेंथा

अमेरिका और जर्मनी जैसे देशों को आर्गेनिक मेंथा के एक्सपोर्ट के बारे में निहाल सिंह बताते हैं, “सारा मेंथा खाने वाली चीजों में जा रहा है। आर्गेनिक मेंथा कास्मेटिक या दवाइयों में जाता है, अगर केमिकल हैं तो बहुत खतरनाक होते हैं, स्किन को नुकशान पहुंचाते हैं तो फायदा नहीं होता है, सुगंध का भी असर होता है, आर्गेनिक वाले का थोड़ा अच्छा रहता है।”

निहाल अपने साथ काम कर रहे किसानों को वर्मी कम्पोस्ट आदि बनाने की ट्रेनिंग देकर उनकी यूनिट लगाने में मदद करते हैं। जिससे रासायनिक खाद की खपत कम हो और लोगों का पैसा बचे। मिट्टी की सेहत को सुधारने के लिए निहाल कहते हैं, “कुछ कठोर निर्णय लेने होंगे, पिछली दो पीढ़ियों से केमिकल की लत पड़ गई है, जब तक केमिकल नहीं हटेगा हमारी फसलों से, तो जो अंतर्राष्ट्रीय स्तर पर मानक हैं हम पूरे नहीं कर पाएंगे।

इसके साथ ही आप दिल्ली की टीचर का jaivik kheti से आर्गेनिक सब्जी उगाने का मॉडल जरूर देखिए

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संभावनाओं से डरकर किसान खेती में अधिक खर्च करते हैं

निहाल सिंह किसानों को सलाह देते हुए करते हैं “किसान भविष्य की संभावनाओं से डरकर ज्यादा खर्च करता है। किसान भाइयों से कहूंगा कि खेती, पेड़, पौधों को उगाने में जैविक चीजों का प्रयोग करें, उसमें पौधों जंतुओं और सूक्ष्म जीवों का काम है, अगर इसमें रसायन का इस्तेमाल करेंगे तो रिजल्ट हमेशा भयावह आएंगे।”

निहाल आगे कहते हैं, “किसानों के मित्र कीट और जीव बहुत सारे होते हैं, लेकिन हमने उन्हें दुश्मन कीटों के चक्कर में मार दिया। किसान ज्यादा से ज्यादा देसी हरी या आर्गेनिक खाद का प्रयोग करें। किसान यह जरूर सोचें कि जो दवाई और केमिकल हम डाल रहे हैं, वह आगे तक के लिए कितना भयावह होगा।”

युवाओं, किसानों और समाज के लिए सन्देश

हम सभी को पता है कि खेती करना चुनौतियों से भरा कार्य है। अभी कोरोना काल में जब सब कुछ बंद था तब भी सिर्फ किसान ऐसा था जिसका हल नहीं रुका। वो हमेशा रात दिन मेहनत करता है। जब हम अपने घरों में सो रहे होते हैं, हमें अंदाजा भी नहीं होता है कि कोई इंसान उस ठंडी रात में भी खेत पर पानी से जमीन को सींच रहा होता है। आज के समाज की सोच इस तरह हो रही है कि किसान को सम्मान नहीं मिल रहा है।

हर कोई सम्मान चाहता है, और यह उसे मिलना भी चाहिए, सम्मान हर किसी का हक़ है। समाज में बड़े से बड़ी नौकरी या व्यापर करने वाले हर इंसान को जिन्दा रहने के लिए रोटी चाहिए और वो सिर्फ और सिर्फ तब संभव है जब तक किसान कार्य करता है। रोटी के बिना कोई जिंदा नहीं रह सकता। लेकिन समाज में ऐसा क्या हो गया कि एक किसान अपने बच्चों को कभी किसान बनाने के बारे में नहीं सोचता है। उसकी हमेशा कोशिश रहती है कि बच्चों को पढ़ा लिखाकर कोई दूसरा व्यवसाय या नौकरी करने लायक बनाये।

इस बात को हम सभी को समझना पड़ेगा कि खेती करना आसान नहीं है, गर्मी की धूप में तपकर और शर्दी की रात में ठिठुर कर भी वो जमीं को सींचता है, हर पल प्रकृति को संजोता है पूरी दुनिया का पेट भरने वाला खुद का पेट नहीं भर पाता है। क्या उसी का पेट इतना बड़ा है? सोचना पड़ेगा दोस्तों…

किसान भाइयों और उन युवाओं, जो खेती करना चाहते हैं, को खेती को अच्छे से समझना होगा। पुराने तरीके से खेती करते हुए सदियां हो गयी हैं लेकिन कुछ खास हासिल नहीं हुआ है। समय के अनुसार खेती करने का तरीका बदलना होगा। Jaivik Kheti की आज के समय में बहुत डिमांड है। इसकी ट्रेनिंग लेकर शुरुआत कर सकते हैं। शुरुआत में मुश्किलें आएंगे, वो हर नए काम में आती हैं।

सारांश

इस प्रकार मैंने इस पोस्ट में jaivik kheti के बारे में बात की और what is jaivik kheti in hindi? इसके बारे बताया की जैविक खेती क्या होती है? इसके क्या लाभ हैं और इसे कैसे किया जाता है और आपको jaivik kheti करनी है तो आप ट्रेनिंग के लिए संपर्क कर सकते हैं। इसके बारे में मैंने इस पोस्ट वर्मीकम्पोस्ट (केंचुआ खाद) क्या है? विधि, उपयोग व लाभ! में बताया है।

इस पोस्ट में मैंने आपको jaivik kheti की book भी suggest की हैं सरल hindi भाषा में। इसके आलावा आप अगर आपको गमले या बगीचे के लिए जैविक खाद की आवश्यकता है तो आप उसे पांच, दस या पंद्रह किलो के पैकेट में ऑनलाइन खरीद सकते हैं।

अगर आपका jaivik kheti से सम्बंधित कोई सवाल है या कोई अतिरिक्त जानकारी चाहिए तो आप नीचे कॉमेंट करके पूछ सकते हैं या हमें संपर्क कर सकते हैं। पोस्ट को शेयर करके दूसरे अपने परिचितों तक हमारी बात पहुँचाने में मदद करें धन्यवाद।

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